चित्तौड़गढ़ निंबाहेडा 8 साल से फरार NDPS आरोपी आखिरकार मानसा से गिरफ्तार

8 साल से फरार NDPS आरोपी आखिरकार गिरफ्तार – नीमच से पकड़ाया, पुलिस की चौकस निगाहों ने दिलाई सफलता
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़, 17 नवम्बर। जिले की पुलिस के लिए चुनौती बन चुका एक ऐसा आरोपी, जो पिछले आठ साल से कानून को चकमा देकर फरारी की जिंदगी जी रहा था, आखिरकार पुलिस की सटीक योजना, मजबूत नेटवर्क, और ऑपरेशन “सुदर्शन चक्र” के तहत चलाए गए अभियान का शिकार बन गया। एमपी के नीमच जिले के मनासा क्षेत्र से गिरफ्तार इस आरोपी का नाम है — बना उर्फ बनालाल भील, जो NDPS एक्ट के तहत 2017 से वांछित चल रहा था।

पकड़ाई की यह कहानी किसी फिल्मी प्लॉट से कम नहीं है—एक आरोपी, जो लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा, अपने गांव से दूरी बनाए रखता रहा, मजदूर बनकर अलग इलाकों में जिंदगी बिताता रहा, और पुलिस की निगाहों से बचता रहा। लेकिन किस्मत आखिर कब तक साथ देती? इस बार पुलिस का फंदा इतना मजबूत था कि आरोपी बच नहीं सका।



ऑपरेशन सुदर्शन चक्र — फरार अपराधियों के खिलाफ मजबूत अभियान

जिले के पुलिस अधीक्षक श्री मनीष त्रिपाठी ने बताया कि उदयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान *“ऑपरेशन सुदर्शन चक्र”* चलाया जा रहा है। इस अभियान का मकसद था—

सालों से फरार चल रहे आरोपियों को पकड़ना

NDPS के मामलों में वांछित लोगों को ट्रैक कर गिरफ्तार करना

जिले में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाना


एएसपी सरिता सिंह और डीएसपी निम्बाहेड़ा बद्रीलाल राव के निर्देशन में कोतवाली निम्बाहेड़ा थानाधिकारी रामसुमेर मीणा (पु.नि.) को विशेष रूप से इस दिशा में कार्रवाई का जिम्मा दिया गया।



AS-I सूरज कुमार और टीम की शानदार प्लानिंग

इस गिरफ्तारी को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई—
एएसआई सूरज कुमार और उनकी टीम:

कांस्टेबल वीरेंद्र

कांस्टेबल सुमित

कांस्टेबल राकेश

कांस्टेबल देवेंद्र


टीम ने बड़ी ही गुप्त तरीके से सूचनाएँ एकत्र कीं। उन्होंने आरोपी की हर छोटी जानकारी को जांचा—
कहां जाता है, किससे मिलता है, कब अपने गांव आता है, उसकी दिनचर्या कैसी है, और वह किस नाम से रह रहा है।

इन सब सूचनाओं से एक बात पक्की हुई—
आरोपी अक्सर अपने असली घर नहीं आता, बल्कि गांधी सागर (थाना रामपूरा) में मजदूरी करता है।

लेकिन असली मौका तब मिला जब पुलिस को पता चला कि आरोपी किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने गांव मनासा आया है।
यही था पुलिस के लिए सोने पर सुहागा मौका।

फिल्मी अंदाज़ में डिटेन — और फिर गिरफ्तारी

जैसे ही मुखबिर ने सूचना दी कि बना उर्फ बनालाल मनासा में मौजूद है, पुलिस की टीम तुरंत हरकत में आ गई।
नीमच जिले के थाना मनासा के हेड कांस्टेबल अकीब मेव का भी सहयोग इस ऑपरेशन में अहम रहा।

पुलिस टीम मनासा पहुँची, इलाके को घेराबंदी कर शांति से निगरानी शुरू की।
आरोपी को शक ना हो, इसलिए टीम ने सादा वर्दी में काम किया।
कुछ देर बाद जैसे ही आरोपी सार्वजनिक स्थान पर दिखा—एकदम अचानक, बिना किसी हंगामे के, पुलिस ने दबोच लिया।

आरोपी पहले तो हक्का-बक्का रह गया।
उसकी आंखों में डर दिखाई दे रहा था, जैसे उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि 8 साल की फरारी आखिर खत्म हो चुकी है।
फिर पुलिस ने उससे पूछताछ की, और आवश्यक अनुसंधान के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया।




कैसे बचता रहा आरोपी इतने वर्षों तक?

जांच में सामने आया कि:

गिरफ्तारी के डर से वह अपने गांव से दूरी बनाए रखता था

गांधी सागर क्षेत्र में मजदूरी कर अपनी पहचान बदलकर रहता था

कभी एक जगह ज्यादा समय तक नहीं रुकता था

किसी भी अपने रिश्तेदार या परिचित से खुलकर संपर्क नहीं करता था

गांव में भी केवल किसी खास कार्यक्रम में ही आता था


इसी वजह से वह इतने लंबे समय तक पुलिस को चकमा देता रहा।

लेकिन पुलिस ने यह भी बताया कि NDPS मामलों में फरार चल रहे आरोपी चाहे जितनी कोशिश कर लें, लंबे समय तक बच पाना आसान नहीं होता।
पुलिस अपनी सूची अपडेट रखती है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखती है।

यह मामला क्या था?

साल 2017 में थाना कोतवाली निम्बाहेड़ा में मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित मामला दर्ज हुआ था।
इस केस में बना उर्फ बनालाल भील मुख्य आरोपियों में शामिल था।
तब से यह लगातार पुलिस से फरार था और अदालत द्वारा भी वांछित घोषित किया जा चुका था।

8 साल से उसकी तलाश जारी थी, और यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता है।

पुलिस की बड़ी उपलब्धि — NDPS मामलों पर मजबूत कार्रवाई

इस तरह की गिरफ्तारी एक संदेश देती है कि—

मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस बेहद गंभीर है

फरार रहने से राहत नहीं मिलती

चाहे आरोपी कितने भी राज्यों में जाकर छिपे हों, पुलिस उन्हें ढूंढ लेगी

ऑपरेशन सुदर्शन चक्र NDPS मामलों पर अंकुश लगाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है

पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस का सशक्त और पेशेवर रवैया जरूरी है, जिससे जिले में कानून का सम्मान और सुरक्षा का माहौल कायम रहे।

आगे क्या होगा?

अब आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि:

8 वर्षों के दौरान आरोपी ने किन-किन जगहों पर डेरा डाला

क्या उसके कनेक्शन किसी तस्करी गैंग से जुड़े थे

क्या वह अभी भी किसी अवैध गतिविधि में शामिल था

फिलहाल यह साफ है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, और देर-सबेर अपराधी पुलिस की पकड़ में आते ही हैं।

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