उदयपुर यूडीए की कार्रवाई से भड़का पेराफेरी क्षेत्र: हजारों लोग सड़क पर, ‘घर बचाओ–पट्टा दो’ की गूंज

यूडीए कार्रवाई के बाद पेराफेरी में उबाल: हजारों लोगों की आवाज़—“घर बचाओ, पट्टा दो”
डीएस सेवन न्यूज़ उदयपुर। यूडीए द्वारा 6 नवंबर को पेराफेरी क्षेत्र में की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद आसपास के गांवों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। दशकों से बसे हजारों परिवारों का दर्द आज फूट पड़ा, जब भारी संख्या में लोग जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार व यूडीए प्रशासन से एक ही मांग दोहराते रहे—“पहले पट्टा दो, फिर कार्रवाई करो।”

प्रदर्शन में बुजुर्ग महिलाएं, युवा, मजदूर और छोटे किसान—सभी शामिल हुए। लोगों का कहना था कि पेराफेरी क्षेत्र ने हमेशा शहर के विकास का बोझ उठाया है, लेकिन अब वही परिवार असुरक्षा में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 20–30 साल से बसे घरों को अचानक ‘अतिक्रमण’ बताकर नोटिस थमा दिया गया, जबकि जमीन से जुड़े 2000 से ज्यादा पट्टों की फाइलें यूडीए दफ्तर में वर्षों से लंबित पड़ी हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं है और कई कच्चे-पक्के घरों को बिना वैकल्पिक समाधान बताए तोड़ा जा रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार पहले ही पुराने काबिजों को पट्टा देने का आदेश जारी कर चुकी है, तो फिर मैदान में इसकी पालना क्यों नहीं हो रही? न सर्वे हो रहा है और न फाइलों की जांच।

संघर्ष समिति के संयोजक चंदन सिंह देवड़ा व पूर्व समाज कल्याण सदस्य डॉ. दिव्यानी कटारा ने चेतावनी दी कि यदि पेराफेरी क्षेत्र के लिए स्पष्ट नीति नहीं बनी और पट्टों की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने घर और भविष्य की सुरक्षा के लिए है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र ने शहर को बसने जगह दी, वहां के परिवारों को स्थिरता मिलना उनका हक है।

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